दोराहा में खुलेआम किताबें बेचने के नाम स्कूलों द्वारा चलाया जा रहा है गोरख धंधा

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बच्चों के माता पिता ने मुख्य मंत्री से लगाई गुहार दोराहा लुधियाना 20 फरवरी मुदित मोहिंद्रा

यहां हर मां बाप का सपना होता है कि वह अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलवा कर एक अच्छा इंसान बना सके और जो के आगे जाकर उनका नाम रोशन करें जिसके चलते अक्सर मां-बाप कष्ट झेल कर भी अपने बच्चों को बड़े-बड़े स्कूलों में दाखिल करवाते हैं जिससे कि उनका बच्चा पढ़ लिखकर काबिल इंसान बन सके वही शिक्षा के नाम पर इन स्कूलों द्वारा गोरख धंधा चलाया जा रहा है और खुलेआम मां-बाप की लूट की जाती है बता दें कि दोराहा में करीब 10 से 12 प्राइवेट स्कूल है जिन मैं से एक दो स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या हजारों में है वही या प्राइवेट स्कूल वालों द्वारा हर वर्ष फीस के साथ-साथ बच्चों को किताबें बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जा रहा है जिसके चलते अच्छी शिक्षा दिलाने के चक्कर में आम लोगों की लूट हो रही है 

वर्णन योग है कि जहां पंजाब सरकार द्वारा प्राइवेट स्कूलों में किताबें बेचने पर पाबंदी लगा रखी है वही इन स्कूलों द्वारा सरकार की आंखों में धूल जोकर बच्चों के माता-पिता की जेबों पर डाका डाला जा रहा है क्योंकि हर प्राइवेट स्कूल द्वारा किताबें बेचने के लिए अपने पक्के दुकानदार रखे हुए हैं जिस स्कूल द्वारा किताबें बेचने के लिए जो दुकानदार निर्धारित कर दिया गया सिर्फ उसी दुकानदार से स्कूल की किताबें मिलती हैं इसके अलावा वह किताबें पूरे शहर में किसी भी दुकानदार के पास उपलब्ध नहीं होती

अब बताते हैं आपको कैसे चलता है यह गोरख धंधा

जब इन स्कूलों में बच्चों के माता-पिता दाखिला करवाने जाते हैं तो वहां उपस्थित स्कूल का स्टाफ आपको किताबों की लिस्ट के साथ-साथ दुकानदार का नाम भी बताता है यहां से आपको यह किताबें मिलेगी अगर कोई व्यक्ति इन किताबों की तलाश में पूरा शहर भी घूम लेता है तो उस को यह किताबें नहीं मिलती

सीबीएसई स्कूल द्वारा अच्छी शिक्षा की आड़ में हो रही है लूट

बता दे कि जहां हर मां-बाप अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए सीबीएसई स्कूल में पढ़ना चाहता है वही या स्कूल वाले प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें लगा मोटी फीसों के साथ-साथ किताबों में भी लूट मचा रहे हैं

कैसे चलता है यह गोरख धंधा

अब आपको बताते हैं कि कैसे चलता है या गोरखधंधा स्कूल वालों द्वारा जिस दुकानदार का नाम पब्लिशर को दिया जाता है पब्लिशर सिर्फ उसे दुकानदार को ही माल देता है अगर कोई अन्य दुकानदार पब्लिशर का पता ढूंढ कर माल लेने चला भी जाए तो पब्लिशर उसे माल देने से इनकार कर देता है स्कूल खुद भी पूरा साल इन किताबों का गोरख धंधा चलता है स्कूल द्वारा सेशन शुरू होने के बाद खुद के पास से भी किताबें दी जाती हैं और मोटी रकम वसूल कर मां-बाप को लूटा जाता है वहीं मां-बाप अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के नाम पर मजबूर हो जाते हैं इस मौके कुछ पीड़ित मां-बाप ने बातचीत करते हुए बताया कि हर वर्ष सभी प्राइवेट स्कूल वाले जरूरतमंद और मध्यम वर्ग के लोगों को किताबों के नाम पर खुलेआम लूटते हैं कुछ मां-बाप ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्कूल वालों द्वारा अपने निर्धारित किए हुए दुकानदार के पास उन्हें किताबें खरीदने के लिए भेजा जाता है और इसके साथ ही हर वर्ष इन किताबों में से कुछ किताबें बदल दी जाती हैं जिससे कि बच्चे पुरानी किताबें लेकर पढ़ ना सके जहां पंजाब सरकार द्वारा बेहतर शिक्षा देने के प्रयास किया जा रहे हैं जिसके चलते सरकारी स्कूलों को अपग्रेड करके बच्चों को नई-नई प्रणाली के साथ शिक्षा दी जा रही है वहीं यह प्राइवेट स्कूल शिक्षा की आड़ में खुलेआम दुकानदारी कर रहे हैं इस मौके उन्होंने मुख्यमंत्री पंजाब से ऐसे स्कूलों की जांच करके बनती करवाई कर शिक्षा को व्यापार बनाने बालों को काबू करने की मांग करी 

 

 

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Author: Bnn 24 News

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