स्कूल प्रिंसिपल द्वारा व्हाट्सअप ग्रुप में दुकानदार का नाम डाल किताबें और स्कूल की वर्दी खरीदने के दिए जा रहे हैं निर्देश  स्कूल मैनेजमेंट

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स्कूलों की सहायता से चलाया जा रहा है किताबें बेचने का गोरख धंधा

स्कूल प्रिंसिपल द्वारा व्हाट्सअप ग्रुप में दुकानदार का नाम डाल किताबें और स्कूल की वर्दी खरीदने के दिए जा रहे हैं निर्देश

 

 

स्कूल मैनेजमेंट द्वारा सरकारी नियमों की उड़ाई जा रही है खिल्ली और लूटा जा रहा है भोले वाले लोगों को

दोराहा लुधियाना 7 अप्रैल

यहां बेहतर शिक्षा दिलाने के चक्कर में माता-पिता इन प्राइवेट स्कूलों मैं मोटी फीस भर कर अपने बच्चों को पढ़ाने का प्रयास करते है वहीं यह निजी स्कूल अलग अलग हथकंडों से इन बच्चों के माता पिता को लुटते जा रहे हैं वहीं इन प्राइवेट स्कूल वालों द्वारा किताबों ओर वर्दियों के मामले में भी दुकानदार के साथ सेटिंग कर बच्चों के माता-पिता को लूटा जा रहा है ऐसा ही एक मामला दोराहा के निजी स्कूल ग्रीन ग्रोव बड़ी बडीज स्कूल का सामने आया जहां स्कूल की प्रिंसिपल द्वारा कक्षाओं के बने व्हाट्सअप ग्रुप में सीधे तौर पर बच्चों के माता-पिता को एक दुकानदार से ही किताबें खरीदने के लिए कहा गया इतना ही नहीं प्रिंसिपल द्वारा स्कूल की वर्दी खरीदने के लिए भी एक दुकानदार का नाम बताया गया उसके साथ ही प्रिंसिपल द्वारा बच्चों के माता-पिता को किताबें और वर्दी खरीद कर उसका बिल ग्रुप में डालने के आदेश भी दिए गए जो की स्कूल की प्रिंसिपल की कारगुजारी पर सवाल खड़े करता है क्योंकि शिक्षा विभाग द्वारा सख्त आदेशों के बाद भी निजी स्कूलों द्वारा किताबें सिर्फ एक दुकान से लेने की बात कही जा रही है वह वही यह बात बताने लायक है कि दुकानदारों को किताबें देने वाले पब्लिशर या थोक किताब विक्रेता सिर्फ उसी दुकानदार को किताबें देते हैं जिनका नाम स्कूल द्वारा उनको दिया जाता है अन्य किसी दुकानदार को उनके द्वारा किताबें नहीं दी जाती जिसके चलते अगर चाह कर भी बच्चों के माता-पिता स्कूल की किताबें किसी अन्य दुकानदार से नहीं खरीद पाए और उन्हें मजबूरी वंश स्कूल द्वारा बताए गए दुकानदार से ही किताबें खरीदनी पड़ती हैं यह हालात सिर्फ इस स्कूल के नहीं दोराहा के अन्य स्कूलों के भी हैं

क्या कहना स्कूल प्रिंसिपल विंसी जॉर्ज का

जब इस मामले के संबंध में स्कूल प्रिंसिपल विंसी जॉर्ज से बात करी तो उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष कुछ किताबें न मिलने के चलते उन्हें उन्होंने ग्रुप में एक दुकानदार का नाम डाला था जिससे के माता-पिता को किताबें मिल सके वहीं जब उनसे अन्य दुकानदारों का नाम पूछा गया तो वह नाम बताने में असमर्थ रहे वहीं जब दोराहा के कोई दुकानदारों से इस स्कूल की किताबों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने किताबें न होने की बात कही व कहा कि उनके द्वारा प्रिंसिपल से मिलने का प्रयास किया गया था परंतु वह नहीं मिले वह उनके पास स्कूल की किताबें भी नहीं है क्यों कि जिस व्यक्ति द्वारा किताबें दी जाती है वह स्कूल वालों की इजाजत के बिना किताबें नहीं देता

कैसे चलता है स्कूलों का गोरख धंधा

अब आपको बताते हैं कि कैसे चलता है स्कूलों का किताबों को बेचने का गोरख धंधा बता दें कि स्कूल वालों द्वारा अपने सुनिश्चित किया दुकानदारों की लिस्ट किताब विक्रेता तो वह दी जाती है जिस पर किताब विक्रेता उन दुकानदारों को माल देता है और अगर अन्य कोई दुकानदार इस किताब विक्रेता के पास माल लेने चला भी जाए तो उसे वह माल नहीं देता

पंजाब सरकार द्वारा हर वर्ष स्कूलों पर निखिल कसने के लिए बड़े-बड़े बयान जारी कर दिए जाते हैं पर जमीनी स्तर पर इन निजी स्कूलों पर कोई भी कार्रवाई नहीं होती इन निजी स्कूलों द्वारा अपने विक्रेता के साथ सेटिंग कर मोटे मुनाफे के साथ किताबें वह स्कूल की वर्दी बेची जाती हैं जिनकी तरफ ना तो शिक्षा विभाग और ना ही पंजाब सरकार द्वारा पर्याप्त ध्यान दिया जा रहा है और जिसके चलते आम और मध्यम वर्गीय लोगों की जेबों पर मोटा आर्थिक बोझ पड़ रहा है

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Author: Bnn 24 News

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